सहरसा। समृद्धि यात्रा कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री से सहरसा में "विश्वविद्यालय अंगीभूत इकाई शिक्षा-शास्त्र विभाग शिक्षक संघ" के एक प्रतिनिधि मंडल में प्रदेश अध्यक्ष डॉ० रूपेश कुमार झा के नेतृत्व में डॉ० अनंत नारायण पांडे,धनंजय सिंह यादव, डॉ० पी के वत्स, डॉ० अभिषेक कुमार, डॉ० संजीत कुमार, डॉ० सरिता कुमारी एवं देववंश कुमार ने डी बी रोड में ओवर ब्रिज निरीक्षण के दौरान बिहार के 29 महाविद्यालय में संचालित शिक्षा-शास्त्र विभाग (बी एड) को स्थाई करने के लिए मुख्यमंत्री को दिया ज्ञापन। उल्लेखनीय है कि इस विभाग की स्थापना मुख्यमंत्री ने ही वर्ष 2010 में अपने महत्वाकांक्षी योजनाओं के तहत किया था।
वहीं वित्त अनुदानित शिक्षकों ने सुरक्षा व्यवस्था के बीच अधिकारियों के माध्यम से अपना ज्ञापन भेजवाया। शिक्षक अजय कुमार वर्मा, मंत्रेश्वर मिश्रा एवं देवनारायण राय सहित शिक्षकों ने ज्ञापन में कहा कि कई सत्रों का अनुदान लंबित रहने के कारण हजारों कर्मियों की लगातार मृत्यु अर्थभाव, व समुचित इलाज के बिना हो रही है। सुशासन की सरकार ने राज्य के सभी संवर्ग के कर्मियों एवं संविदा कर्मियों को भी सभी प्रकार की सुविधाएं प्रावधानित किया है। समान प्रबंधकीय व्यवस्था/शासी निकाय द्वारा संचालित मदरसा और अल्पसंख्यक संस्थानो के कर्मियों को भी एनडीए सरकार ने वेतन और अन्य सभी सरकारी सुविधायें देने का कार्य किया है।वित्तानुदानित कर्मियों को न तो नियमित वेतन मिलता है, न प्रोन्नति, न ही पेंशन। चिकित्सा सुविधा, जीवन बीमा, भविष्य निधि से वंचित इन कर्मियों का दुर्घटना अथवा आकस्मिक मृत्यु होने पर पारिवारिक लाभ तो दूर कफन भी नसीब नहीं होता है।सात निश्चय-03 के तहत उच्य-शिक्षा विभाग बिहार सरकार पत्रांक 15/पी०5-62/2025 द्वारा प्रत्येक प्रखण्ड मे एक डिग्री कॉलेज स्थापित होना है। जबकि, दशकों पूर्व से स्थापित एवं संचालित वित्तानुदानित संस्थानो मे लगभग 8 हजार एकड़ भूमि, भवन और आधारभूत संरचना (अनुमानित मूल्य 50 हज़ार करोड़) उपलब्ध है। इन संस्थानो के आधे से अधिक कर्मी सेवानिवृत हो चुके है, और शेष कर्मियों का वेतन अधिभार उपलब्ध संसाधन की तुलना मे नाममात्र ही होगा। इसलिए प्रदेश की उच्य शिक्षा और समाज के व्यापक हित में इन सभी संस्थानो का अधिग्रहण नितांत आवश्यक है।
बिहार का एकमात्र संवर्ग वित्तानुदानित कर्मी, न्याय के साथ विकास की यात्रा मे छुट गया है जो सुशासन की सरकार मे वेतन तो दूर किसी भी प्रकार की सुविधा से वंचित है।
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