नगर निगम क्षेत्र में प्रदूषण प्रमाणपत्र बनाने के नाम पर मनमानी वसूली, आम लोग परेशान...

सहरसा। नगर निगम क्षेत्र में वाहनों का प्रदूषण प्रमाणपत्र (पीयूसी) बनवाने के नाम पर निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूले जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। आम लोगों का आरोप है कि परिवहन विभाग द्वारा दोपहिया वाहनों के लिए प्रदूषण प्रमाणपत्र का निर्धारित शुल्क 80 रुपये तय है और उसी राशि की रसीद भी जारी की जाती है, लेकिन अधिकांश लोगों से 100 रुपये तक वसूले जाते रहे हैं। चूंकि अतिरिक्त राशि अपेक्षाकृत कम होती थी, इसलिए अधिकांश लोग शिकायत दर्ज कराने से बचते रहे।

हाल के दिनों में स्थिति और गंभीर हो गई है। नगर के तिवारी चौक स्थित एक प्रदूषण जांच केंद्र के बंद हो जाने के कारण शेष केंद्रों पर लोगों की निर्भरता बढ़ गई है। इसका लाभ उठाते हुए कुछ संचालकों द्वारा दोपहिया वाहनों का प्रदूषण प्रमाणपत्र बनाने के लिए 80 रुपये के स्थान पर 150 रुपये तक की मांग किए जाने की शिकायत मिल रही है। इससे वाहन मालिकों में नाराजगी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि परिवहन विभाग द्वारा चलाए जा रहे वाहन जांच अभियान में प्रदूषण प्रमाणपत्र को अनिवार्य दस्तावेज के रूप में देखा जा रहा है। प्रमाणपत्र नहीं होने पर चालान की आशंका बनी रहती है। ऐसे में वाहन मालिक मजबूरी में अधिक राशि देकर भी प्रमाणपत्र बनवाने को विवश हैं।

लोगों का आरोप है कि प्रदूषण जांच केंद्रों पर शुल्क सूची का प्रभावी अनुपालन नहीं कराया जा रहा है और न ही अतिरिक्त वसूली की नियमित निगरानी की जा रही है। यदि परिवहन विभाग समय-समय पर जांच कर निर्धारित शुल्क का सख्ती से पालन सुनिश्चित करे तो आम लोगों को राहत मिल सकती है।

नगरवासियों ने जिला प्रशासन एवं परिवहन विभाग से मांग की है कि प्रदूषण जांच केंद्रों की जांच कर निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूलने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। साथ ही शहर में पर्याप्त संख्या में अधिकृत प्रदूषण जांच केंद्र संचालित कराए जाएं, ताकि लोगों को उचित शुल्क पर आसानी से प्रदूषण प्रमाणपत्र उपलब्ध हो सके।

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