सामाजिक सुरक्षा पेंशन में लापरवाही पर स्थायी लोक अदालत का सख्त रुख...

सुपौल। सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसे योजना में कार्यालय कर्मी द्वारा लाभूक को परेशान किए जाने के मामले को स्थायी लोक अदालत सुपौल के सदस्य डॉ० अरविन्द कुमार झा ने गंभीरता से लिया है।

उन्होंने इस कृत्य से अवगत कराते हुए जिला पदाधिकारी सुपौल को प्रेषित पत्र में कहा कि लाभुक गंगा देवी (पति: रामकिशुन चौधरी), वार्ड नं०-12, सुपौल, एक गरीब परिवार से हैं जो आजीविका के संकट से जूझ रही हैं। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा पेंशन हेतु आवेदन किया था, किंतु आधार कार्ड एवं घरेलू रिकॉर्ड में नाम के अंतर के कारण उनकी पेंशन रुकी हुई है।

 इस समस्या के समाधान हेतु लाभुक ने कई बार प्रखंड कार्यालय का दौरा किया। उन्हें लगा कि सरकार के इस महत्वपूर्ण योजना के व्यापक लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकारी कर्मी उनकी मदद करेंगे, परंतु उन्हें कोई सहायता नहीं मिली। इसके उपरांत, उन्होंने अनुमंडल लोक शिकायत कार्यालय में अपनी समस्या दर्ज कराई। वहां दिलीप कुमार, कार्यपालक सहायक सा० सु० कोषांग द्वारा प्रतिवेदन दिया गया कि नाम में सुधार कर दिया गया है और अब डी.बी.टी. के माध्यम से भुगतान किया जाएगा। किंतु व्यवहार में ऐसा नहीं हुआ, जो लोक शिकायत प्रणाली के प्रति गंभीर अविश्वास पैदा करता है। लोक पदाधिकारी को ग़लत तथ्य प्रस्तुत करना भी अपराध है। इसके पश्चात, लाभुक ने स्थायी लोक अदालत में आवेदन किया। परिवाद संख्या 16/25 की सुनवाई के दौरान दिनांक 15 दिसंबर 25 को प्रखंड कार्यालय के प्रतिनिधि को निर्देश दिया गया कि वे संबंधित कर्मी से समन्वय कर त्वरित समाधान प्रस्तुत करें। सदस्यगण ने यह भी सुझाव दिया कि यदि आवश्यक हो, तो सी.एस.पी. सेंटर के माध्यम से भी लाभुक से उचित शुल्क लेकर कार्य पूरा किया जा सकता है, ताकि अगली तिथि से पूर्व लाभुक को उसका अधिकार मिल सके।

 किंतु प्रखंड कार्यालय सुपौल द्वारा दिनांक 16 दिसंबर 25 के पत्रांक 3665 में पुनः एक गलत तथ्य प्रस्तुत किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि जीवन प्रमाणीकरण किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि बिना उनके आई.डी. को सुधारे जीवन प्रमाणीकरण संभव नहीं है। यह त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट जानबूझकर या लापरवाहीवश दी जा रही है, जिससे गरीब महिला के अधिकारों का हनन है। उल्लेखनीय है कि स्थायी लोक अदालत का उद्देश्य जनहित सेवाओं से जुड़े विवादों का शीघ्र एवं न्यायसंगत निस्तारण करना है। यदि समाधान नहीं निकलता है, तो स्थायी लोक अदालत को मामले के गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेना पड़ता है, जिससे अधिकारियों की उदासीनता सार्वजनिक होती है।

उन्होंने कहा कि चूंकि यह मामला प्रखंड स्तर की कार्यप्रणाली से सीधे जुड़ा है, इसलिए जिला पदाधिकारी के तत्काल संज्ञान एवं हस्तक्षेप की आवश्यकता है। सदस्य डॉ० झा ने  प्रखंड कार्यालय सुपौल द्वारा गलत तथ्य प्रस्तुत करने के कारणों की जांच कराने का जिला पदाधिकारी से आग्रह किया है। जिससे लाभूक को पेंशन का भुगतान डी.बी.टी. के माध्यम से शीघ्र हो। वहीं भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही न हो, इस हेतु प्रखंड स्तर पर एक पारदर्शी तंत्र स्थापित करने का निर्देश दिए जाने की भी बात कही है। इस आशय की सूचना उन्होंने सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार सुपौल को भी दी है।

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