स्थायी लोक अदालत की चुनौतियों पर पटना में मंथन, न्याय व्यवस्था को सशक्त बनाने पर जोर...

पटना। राज्य विधिक सेवा प्राधिकार पटना द्वारा प्रशिक्षण सह संवेदीकरण कार्यक्रम सह स्थायी लोक अदालत की चुनौतियों पर एक परिचर्चा आयोजित की गई। राष्ट्रगान से शुरू हुए इस कार्यक्रम का उद्घाटन बालसा के सदस्य सचिव धर्मेंद्र कुमार सिंह, पूर्व सदस्य सचिव सह स्रोत व्यक्ति श्री ओमप्रकाश, अमेठी विश्वविद्यालय से आए सहायक प्राध्यापक आशुतोष कुमार एवं अन्य गणमान्य ने किया। स्रोत व्यक्ति श्री ओमप्रकाश ने अंग्रेजों ने 1857 के गदर के बाद शासन के लिए कानून बनाए। लेकिन अंग्रेजों के कानून में फीस देनी पड़ती थी। भारत में पंचों और काजी के द्वारा बिना फीस के फैसले होते थे। स्थायी लोक अदालत का गठन भारत के पुराने पद्धतियों को देखते हुए किया गया है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत से अलग 2002 में जन उपयोगी सेवा को परिभाषित किया गया। उन्होंने कहा कि 22 डी के अंतर्गत साक्ष्य लेने एवं आदेश को संशोधित करने का अधिकार है। वहीं एन आई एक्ट में भी कई अधिकार दिए गए हैं। उन्होंने पटना हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट एवं अन्य न्यायालय के न्याय निर्णय पर भी चर्चा करते हुए अपनी बात रखी। सदस्य सचिव धर्मेंद्र कुमार सिंह ने स्थायी लोक अदालत के गठन और उसके कार्य पर चर्चा करते हुए स्थायी लोक अदालत के बैठक की संख्या पर चर्चा की और कहा कि बैठक का परिणाम भी आना चाहिए। स्थायी लोक अदालत जागरूकता कार्यक्रम भी करें। स्थायी लोक अदालत के सदस्यों ने भी अपनी-अपनी समस्याएं रखी। वहीं कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान न्यायाधीश रहे हिमांशु राजपूत ने लोक अदालत एवं स्थायी लोक अदालत के अलग-अलग भूमिका पर चर्चा की और बताया कि कौन-कौन से मामले स्थायी लोक अदालत में विचारणीय होंगे। बैठक में सभी जिलों के स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव एवं स्थायी लोक अदालत के सदस्य मौजूद थे।

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