सहरसा। संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत साहित्य अकादमी तथा स्थानीय स्नातकोत्तर केंद्र में स्थापित परमहंस लक्ष्मीनाथ गोसाई चेयर के संयुक्त तत्वावधान में मैथिली के प्रख्यात साहित्यकार एवं प्राध्यापक डॉ. मनोरंजन झा तथा वरिष्ठ पत्रकार जयानंद झा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर एक दिवसीय विशद् परिसंवाद का आयोजन स्नातकोत्तर केंद्र, सहरसा में किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. अरुण कुमार खां, डॉ. रामनरेश सिंह, डॉ. रमण कुमार सिंह, डॉ. रजनीश रंजन, डॉ. अरुण कुमार सिंह, डॉ. भवानंद मिश्र तथा डॉ. लाला प्रवीण द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर सेवानिवृत्त मैथिली साहित्यकार डॉ. कुलानंद झा ने बीज भाषण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन किशलय कृष्ण तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अरुण कुमार सिंह ने किया।
प्रथम सत्र की अध्यक्षता प्रो. भवानंद मिश्र ने की। इस सत्र में मैथिली के विद्वान धर्मव्रत चौधरी एवं दीपिका चंद्रा ने अपने शोध आलेख प्रस्तुत किए। वहीं सुधासंध्या ने ‘हमारे पिताजी मनोरंजन झा’ विषय पर भावपूर्ण वक्तव्य देते हुए गीत, नाटक, कविता, उपन्यास, आलेख, आलोचना एवं निबंध जैसी विविध साहित्यिक विधाओं में डॉ. मनोरंजन झा के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
डॉ कुलानंद झा ने कहा कि डॉ. मनोरंजन झा जनपक्षधर चेतना के सशक्त कवि थे। उन्होंने अपनी निर्भीक लेखनी से सत्ता के भ्रष्टाचार का विरोध किया तथा गरीबों और वंचितों की आवाज़ को मुखरता प्रदान की। अल्पायु में ही उन्होंने सामाजिक सरोकारों एवं कुरीतियों के विरुद्ध विद्रोही तेवर अपनाए। विश्वविद्यालय को अपना परिवार मानते हुए उन्होंने शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर कार्य किया, जिसके कारण वे लगातार सीनेट सदस्य निर्वाचित होते रहे।
तीसरे सत्र की अध्यक्षता करते हुए लक्ष्मण झा ‘सागर’ ने कहा कि कोसी की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद यहां के साहित्यकारों ने साहित्य की समृद्ध परंपरा को जीवित रखा है। उन्होंने कहा कि कोसी अंचल के अनेक साहित्यकारों की लंबे समय तक उपेक्षा हुई, किंतु अब उन्हें स्मरण किया जाना स्वागतयोग्य है। उन्होंने मैथिली भाषा के संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि कार्यालयों में भले ही हिंदी का प्रयोग हो, किंतु घर-परिवार में मैथिली अवश्य बोली जानी चाहिए। तभी भाषा की जीवंतता बनी रहेगी।
वक्ताओं ने जयानंद झा को मैथिली साहित्य के मूर्धन्य विद्वान, चिंतक, सशक्त पत्रकार तथा बहुभाषाविद् बताते हुए कहा कि वे हिन्दी, अंग्रेज़ी, बंगला, संस्कृत एवं मैथिली भाषाओं के उत्कृष्ट ज्ञाता थे। वरिष्ठ पत्रकार आलोक कुमार झा ने कहा कि जयानंद झा ने पत्रकारिता को लोकसेवा का माध्यम माना। वे पटना विश्वविद्यालय के छात्र रहे तथा सेंट जेवियर्स में हिन्दी के शिक्षक भी थे, किंतु बाद में उन्होंने अध्यापन छोड़कर पत्रकारिता को अपना जीवन समर्पित कर दिया। मैथिली विभाग के प्राध्यापक डॉ. संजय कुमार वशिष्ठ ने भी उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इस अवसर पर जयानंद झा के पुत्र सुकृत्य पाल एवं प्रणत पाल, डॉ. मनोरंजन झा के पुत्र सत्यप्रकाश, डॉ. रमाकांत रमन, अर्थशास्त्र विभाग के प्राध्यापक एवं सीनेटर अनिल कुमार, हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. लाला प्रवीण कुमार सिन्हा, डॉ. सिद्धेश्वर कश्यप, डॉ. जैनेंद्र, डॉ. अणिमा, डॉ. रंजीत कुमार सिंह, डॉ. अरुण कुमार सिंह, डॉ. अरुण कुमार खां, डॉ. भवानंद मिश्र, डॉ. बिजली प्रकाश, डॉ धर्मब्रत चौधरी, डॉ. अरविंद कुमार झा, अवकाशप्राप्त शिक्षक गोपाल झा, नवल मिश्र, विनोद कुमार झा, विनय कुमार ठाकुर, प्रांजल सुमन, धनंजय कुमार झा ‘भगवान झा’, निर्मल मिश्र, सुभाष चन्द्र झा, प्रकाश झा, सुबोध राय, रेणु ज्योति, प्रो. गीता झा सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, शिक्षाविद् एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।

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