पेपर लीक के राष्ट्रीय अभिशाप के कारण युवाओं का सिस्टम से उठ रहा भरोसा - अनुपम


सुपौल। युवा हल्ला बोल आंदोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुपम ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। अनुपम ने कहा कि परीक्षाओं को सुचारू ढंग से करा पाने में सरकार पूर्णतः विफल साबित हुई है। हाल के दिनों में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा आयोजित नीट की परीक्षा और यूजीसी नेट परीक्षा में हुई धांधली के कारण देश भर में आक्रोश है। मेडिकल प्रवेश के लिए होने वाले देशव्यापी नीट की परीक्षा में कई तरह की धांधली और गड़बड़ीयों के बावजूद सरकार छात्रों की सुन नहीं रही है। प्रश्नपत्र लीक होने के पर्याप्त सबूत उपलब्ध होने के बावजूद शिक्षा मंत्री ने शुरू में ही पेपर लीक की बात को सिरे से खारिज कर दिया था। नीट का मामला चल ही रहा था कि अब यूजीसी नेट की परीक्षा में भी गड़बड़ी हो गयी और सरकार ने यह पेपर रद्द करके सीबीआई जांच की घोषणा कर दी। मतलब स्पष्ट है कि केंद्र सरकार परीक्षाएं नहीं करवा पा रही। किसी न किसी को तो इतनी बड़ी विफलता की ज़िम्मेवारी तो लेनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों का परीक्षा तंत्र से विश्वास उठ रहा है। युवाओं में पनप रहा गहरा असंतोष अब आक्रोश का रूप लेता जा रहा है। सिस्टम के प्रति युवाओं में यह अविश्वास बहुत चिंता की बात है। 

    उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि जल्द से जल्द समाधान करके भरोसा बहाल करने की कोशिश करे। लेकिन घोर विडंबना है कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ नामक इवेंट का आयोजन करने वाले प्रधानमंत्री मोदी अभी परीक्षा पे एक शब्द नहीं बोल रहे हैं। अनुपम ने कहा कि भारत को दुनिया का सबसे बड़ा ‘लीक-तंत्र’ बना दिया गया है। हाल ऐसा है कि बिना पेपर लीक के किसी परीक्षा का सम्पन्न हो जाना नामुमकिन सा लगने लगा है। मामले में केंद्र से लेकर राज्य सरकारों तक सबका निकम्मापन और अक्षमता उजागर हो चुकी है। अनुपम ने पेपर लीक को राष्ट्रीय अभिशाप की संज्ञा दी जो देश के भविष्य को खोखला बना रहा है। ईमानदार और मेहनतकश जनता के सपनों को कुचला जा रहा है और भारत के करोड़ों युवाओं की क्षमता को बर्बाद किया जा रहा। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए अनुपम ने कहा कि यह अपराध अक्षम्य है। मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जब तक सत्ता में बैठे असल सरगना को नहीं पकड़ा जाता, तब तक ऐसे घटनाएं नहीं रुकेंगी। आम तौर पर जांच के नाम पर खानापूर्ति करके दो चार निरीह लोगों को गिरफ्तार करके मामले को रफा दफा कर दिया जाता है। इसी कारण से ऐसे घृणित अपराध बदस्तूर जारी है और एक के बाद एक परीक्षा का यही हाल हो जाता है। अनुपम ने बताया कि ‘युवा हल्ला बोल’ आंदोलन लंबे समय से इन समस्यायों के निदान के लिए समाधान सुझाता रहा है। परीक्षाओं को सुचारू ढंग से अंजाम देने और पेपर लीक पर रोकथाम के लिए कई सकारात्मक सुझाव दिए हैं। लेकिन बड़े दुख की बात है कि संवेदना की कमी के कारण यह सरकार जल्द सुनने को तैयार नहीं होती। देश के नागरिकों और युवाओं को एकजुट होकर अब सरकार पर दबाव बनाना पड़ेगा कि वो राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करे। बिना मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के हम इन समस्यायों से बाहर नहीं निकल सकते।

Post a Comment

0 Comments