पटना। भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (IIFT) के गांधीनगर (गुजरात) स्थित गिफ्ट सिटी परिसर की स्थापना और उसके प्रशासनिक दावों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्वराज शांडिल्य ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त अभिलेखों और संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट (2021-2024) के गहन अध्ययन के आधार पर संस्थान की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं।
शांडिल्य का दावा है कि उपलब्ध दस्तावेजों और वास्तविक स्थिति के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। उनके अनुसार, जहाँ सार्वजनिक रूप से गांधीनगर के इस परिसर को वर्ष 2023 से संचालित बताया गया, वहीं नियामकीय अभिलेख (Regulatory Records) इसके औपचारिक अनुमोदन (Approval) को वर्ष 2025 में दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि यह विरोधाभास पूरी प्रक्रिया की शुचिता और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
इसके अतिरिक्त, परिसर में सीमित शैक्षणिक संसाधनों, फैकल्टी की कमी और आधारभूत संरचना को लेकर भी चिंताएं जताई गई हैं। शांडिल्य ने तर्क दिया कि लगभग 25 लाख रुपये की भारी-भरकम फीस लेने वाले इस राष्ट्रीय महत्व के संस्थान से उच्च स्तरीय शैक्षणिक गुणवत्ता की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने इस पूरे मामले में तथ्यों की जांच, प्रशासनिक जवाबदेही और एक स्वतंत्र जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है।
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