मधुबनी। जिले के बेनीपट्टी अनुमंडल अंतर्गत जिरौल गांव की युवा मिथिला पेंटिंग कलाकार खुशबू कुमारी (खुशबू चौधरी) को उनकी उत्कृष्ट कलात्मक प्रतिभा के लिए प्रतिष्ठित 'भारतीय कला श्री सम्मान' से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने मुजफ्फरपुर में आयोजित हेरिटेज नेशनल लेवल आर्ट एग्जीबिशन एंड कंटेस्ट के दौरान प्रदान किया।
खुशबू की मधुबनी चित्रकला में उकेरी गई भगवान श्रीराम और माता सीता के स्वयंवर की मनोहारी कलाकृति तथा मिथिला की लोक परंपरा तुसारी पूजा का जीवंत चित्रण प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण रहा। उनकी कलाकृतियों में मिथिला की सांस्कृतिक विरासत, लोक आस्था और पारंपरिक जीवनशैली का सजीव एवं बारीक चित्रण देखने को मिला।
सम्मान समारोह में कला एवं संस्कृति मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा कि मिथिला चित्रकला को वैश्विक पहचान दिलाने में ऐसे युवा कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि इनकी सृजनात्मकता और सूक्ष्म चित्रांकन भारतीय लोककला की समृद्ध परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है।
प्रसिद्ध मिथिला चित्रकार एवं पद्मश्री श्याम शर्मा ने खुशबू की कलाकृतियों की सराहना करते हुए कहा कि लोक संस्कृति और पौराणिक कथाओं पर आधारित उनकी चित्रकारी न केवल घरों की शोभा बढ़ाती है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और गौरवशाली परंपराओं से भी जोड़ती है।
शाकुंतलम कला संस्कृति के निदेशक डॉ. मुकेश सोना के संयोजन में 17 से 19 जुलाई तक आयोजित इस राष्ट्रीय प्रदर्शनी में देशभर के कलाकारों ने भाग लिया। इनमें खुशबू की मिथिला पेंटिंग दर्शकों और कला प्रेमियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही।
जिरौल गांव निवासी अमोद चौधरी एवं सुनैना देवी की पुत्री खुशबू वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी सम्मानित हो चुकी हैं। वर्ष 2023 में उन्होंने 'अश्क हैंडीक्राफ्ट' नामक संस्था की स्थापना की, जिसके माध्यम से अब तक ग्रामीण क्षेत्रों की 100 से अधिक लड़कियों एवं महिलाओं को निःशुल्क मधुबनी पेंटिंग का प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ा है।
खुशबू रेलवे स्टेशनों, ट्रेनों, अयोध्या में राम मंदिर उद्घाटन के अवसर पर सजाए गए इंजन तथा ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के भवनों पर मिथिला पेंटिंग करने वाली टीम का भी हिस्सा रह चुकी हैं।
सम्मान प्राप्त करने के बाद खुशबू ने कहा, "भारतीय कला श्री सम्मान मेरे लिए गर्व का क्षण है। यह सम्मान मुझे मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र में निरंतर नवाचार करते हुए अपनी कला और संस्कृति को देश-विदेश तक पहुंचाने की नई प्रेरणा देता है।"
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